विक्रेता विकास

मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लिए, आयात प्रतिस्थापन बढ़ाने के क्रम में एचएसएल द्वारा निम्‍नलिखित उपाय उठाए जा रहे हैं और इसके साथ ही 'मैक इन इंडिया' पहल के साथ रक्षा खरीद को समन्वयित किया जा रहा है।

  • औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, क्रय मैनुअल में एवं अपने प्रभावी सार्वजनिक कार्यान्वयन ('मैक इन इंडिया' की प्राथमिकता), आदेश 2017 में निहित प्रावधानों का समावेश किया गया है। 
  • भविष्य की आवश्यकताओं के लिए 5 वर्ष में एक ही भारतीय फर्म पर आश्वासन का आश्वासन जो आयात विकल्प के ऑर्डर को सफलतापूर्वक परिणाम पूरा किया गया।  
  • एमएसई के लिए मानदंडों (पूर्व अनुभव और पूर्व कारोबार) में छूट और सभी सार्वजनिक खरीद में गुणवत्ता और तकनीकी विशिष्टताओं को पूरा करने के लिए स्टार्ट-अप। 
  • भुगतान शर्तों के संरेखण अर्थात् एमएसई को अग्रिम भुगतान का प्रावधान
  • विक्रेताओं के अभ्यस्त पंजीकरण (अन्य रक्षा पीएसयू में पंजीकृत विक्रेताओं को डीम्ड पंजीकृत के रूप में माना जाता है।
  • टाइर I और टाइर II विक्रेताओं की पहचान करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं, ताकि आयात विकल्प के विकास की सुविधा मिल सके।